SIP kya hai | एसआई पी क्या है। SIP में निवेश कैसे करे। What is Mutual Fund S.I.P in Hindi

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आज के दिन हर व्यक्ति अपनी आय में से कुछ भाग बचत करके रखना चाहता है, फिर चाहे उसकी आय कम हो या ज्यादा उसके अनुसार ही वह अपनी बचत की योजना बनाता है। इस तरह से हर व्यक्ति की बचत की राशि अलग अलग हो सकती है और उसके बचत करने का तरीका भी भिन्न हो सकता है। बचत करने का तरीका कुछ भी हो लेकिन सभी का बचत करने का उद्देश्य एक ही होता है, एक बड़ी धन राशि ( Fund ) एकत्रित करना। इसके लिए सिप एक बेहतरीन विकल्प है। ये जरूरी नहीं क़ि हर व्यक्ति के पास निवेश करने के लिए बड़ी राशि हो इसलिए एसआईपी के ज़रिए छोटी छोटी राशि से शुरुआत की जा सकती है।

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एसआई पी क्या है? (SIP kya hai in hindi, Mutual Fund (S.I.P) meaning in Hindi )

एसआईपी यानी व्यवस्थित निवेश योजना (systemetic investment plan ) एक तरीका है जिसके ज़रिए म्यूच्यूअल फंड में निवेश किया जाता है। एसआईपी का मतलब आसान भाषा में कहें तो हर महीने एक निश्चित तिथि को एक निश्चित राशि किसी भी म्यूच्यूअल फंड में निवेश करने के तरीके को को एसआईपी कहा जाता है

एसआईपी के ज़रिए आप कम से कम rs 1000/ प्रति माह से भी अपना निवेश शुरू कर सकते हो। इस तरह छोटी छोटी राशि से निवेश करने से ज्यादा बोझ भी नहीं पड़ता और लम्बी अवधि में अच्छा रिटर्न भी मिल जाता है।

निवेश का यह एक परम्परागत तरीका है। डाक घर (Post Office ) और बैंकों में आवर्ती जमा (Reccuring deposit ) के माध्यम से पैसा निवेश किया जाता रहा है। उसी प्रकार से हर महीने एसआईपी के माध्यम से म्यूच्यूअल फंड में भी निवेश किया जाता है। इसके अंतर्गत आप बैंक को एक फॉर्म साइन करके निर्देश दे सकते हैं क़ि बैंक द्वारा हर महीने स्वचालित तरीके से एक निश्चित राशि आपके खाते (account ) से निकाल कर उस म्यूच्यूअल फंड में ट्रांसफर करता रहता है जो आपने चुना है।

एसआईपी (SIP ) कैसे काम करता है।

एसआईपी (SIP ) एक प्रणाली (तरीका ) है जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति अपनी राशि को म्यूच्यूअल फंड में निवेश कर सकता है। जो भी राशि निवेश की जाती है उसके बदले निवेशक को कुछ यूनिट मिल जाते हैं। इस प्रकार हर महीने निवेशक को उस समय के मूल्य अनुसार यूनिट प्रदान किया जाते हैं।

म्यूचुअल फंड की एक यूनिट की कीमत को एनएवी (नेट एसेट वैल्यू) कहते हैं। यह नेट एसेट वैल्यू ही उस म्युचअल फंड योजना की performance (प्रदर्शन) को बताता है

इसी प्रकार म्युचअल फंड में बहुत सारे लोग पैसा लगाते हैं और फंड मैनेजर उस पैसे को अलग अलग जगह निवेश कर देते हैं इसमें बहुत तरह के शेयर्स और बांड्स होते हैं, इन सब के मिक्सचर को कुछ नंबर में बाँट दिया जाता है और इसके एक हिस्से को एक यूनिट बोला जाता है।

माना कि कोई ABC फंड 15 % ऑटो सेक्टर में , 15 % फार्मा सेक्टर में , 10 % FMCG में , 15 % आई टी सेक्टर में , 10 % टेलीकॉम में , 20 % गवर्मेंट बांड्स में और 15 % अन्य किसी क्षेत्र में लगाया हुआ है। कोई व्यक्ति एक सीमित फंड के चलते इन सभी कंपनियों के शेयर नहीं खरीद सकता मगर वह ABC म्युचअल फंड में निवेश करके इन् सभी कंपनियों में हिस्सेदारी ले सकता है।

यह भी पढ़े: म्युचअल फंड क्या है?| Mutual Fund in Hindi

ब्याज दरनिवेश अवधि और फण्ड पर निर्भर करता है
न्यूनतम राशि1000 रूपए
उम्र18 साल
अवधिकम से कम 1 साल
जोखिमनिवेश अवधि और फण्ड पर निर्भर करता है
टैक्स छूटनहीं

एसआईपी (SIP) के क्या फायदे हैं।

कोई भी व्यक्ति एक मुश्त राशि भी निवेश कर सकता है मगर हम यहाँ एसआईपी (SIP ) के बारे में चर्चा कर रहे हैं। आइये जानते हैं कि एसआईपी (SIP ) के माध्यम से निवेश करने के क्या फायदे हैं।

1. कम पैसे होने पर भी निवेश।

यह जरूरी नहीं कि सभी के पास निवेश करने के लिए ज्यादा राशि हो ज्यादातर लोगों की आय इतनी होती है कि वो अपना घर खर्च ही चला सकते हैं और उसी में से कुछ बचत करके निवेश karte हैं। एसआईपी (SIP ) ऐसे लोगों के लिए बहुत ही अच्छा विकल्प है जिससे कि वो थोड़े थोड़े पैसे निवेश करके अपने लिए बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं।

2. अनुशासित निवेशक बनाता है।

एसआईपी (SIP ) में निवेशक अपनी इच्छानुसार राशि जमा करता है और यह कार्य वो हर महीने करता है, इसके अलावा बैंक द्वारा ऑटो डेबिट का विकल्प भी दिया जाता है। इस तरह से जब हर महीने निवेश होता है तो व्यक्ति एक अनुशासित निवेशक बन जाता है।

3. बाज़ार के उतार चढाव होने पर भी औसत बनाये रखना।

शेयर मार्किट में उतार चढाव आना तो स्वाभाविक है मगर इसके विपरीत एसआईपी (SIP ) के माध्यम से निवेश करने पर बाजार में होने वाले उतार चढाव से निवेश पर असर नहीं पड़ता क्योंकि हर महीने निवेश करने पर उस समय के NAV के अनुसार यूनिट मिलती हैं और औसत बरक़रार रहती है।

4. कम से कम जोखिम का होना।

शेयर मार्किट में सीधे निवेश करने पर जोखिम अधिक होता है। मगर जिन्हे शेयर मार्किट की अधूरी जानकारी है उनके लिए म्यूच्यूअल फंड बेहतर विकल्प है। म्यूच्यूअल फंड में फंड मैनेजर बहुत साड़ी कंपनियों में पैसा लगाते हैं जिससे कि अगर कोई एक या दो कंपनी नुक्सान में भी हैं तो बाकि दूसरी कंपनियों से पूर्ती हो जाती है और नुक्सान के चांस कम से कम होते हैं।

5. लॉन्ग टर्म में कम्पाउंडिंग का फायदा मिलना।

म्यूच्यूअल फंड में रिटर्न अपेक्षाकृत अच्छा मिलता है और इसके साथ साथ जो लाभ मिलता है वो भी निवेश में जुड़ता जाता है। लम्बे अंतराल में इस तरह के निवेश में कम्पाउंडिंग का फायदा मिलता है और आपके द्वारा निवेश की गई राशि से कहीं अधिक रिटर्न मिलता है।

निष्कर्ष

इस लेख से हमने यह जाना कि कैसे एसआईपी (SIP ) के माध्यम से छोटी छोटी बचत एक बड़े फंड के रूप में परिवर्तित होती है और इस लेख का निष्कर्ष यह है कि एसआईपी (SIP ) एक बेहतरीन विकल्प है नए निवेशकों के साथ साथ उनके लिए भी जिन्हे शेयर मार्किट के उतार चढाव से डर लगता है।

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1. SIP कितने साल की होती है? (एसआईपी (SIP) की अवधि क्या है ?

एसआईपी (SIP) की अवधिकम से कम 1 साल है।

2. क्या SIP में हमेशा मुनाफा देता है ?

एसआईपी (SIP) में हमेशा फायदा नहीं होता। लाभ और हानि चयन किये गए निवेश और फण्ड पर निर्भर करता है।

यह भी पढ़े: सोने की निवेश योजनाओं पर एक नजर | 5 Gold Investment Scheme in Hindi | सोने में निवेश करने के पांच तरीके

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DISCLAIMER

यह लेख एक सूचना मात्र है जिसमे म्युचअल फंड में निवेश करने के तरीकों की जानकारी दी है और हम इसमें कहीं भी पाठको को निवेश करने के लिए प्रेरित नहीं कर रहे। निवेश करने से पहले योजना से जुड़े सभी दस्तावेज़, शर्ते व नियम ध्यान से पढ़ें। निवेश करने से पहले अपने आर्थिक सलाहकार (फाइनेंसियल एडवाइजर ) की सलाह जरूर ले लेवें।

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