आय कर पुरानी योजना बनाम नई योजना ( Income Tax old regime vs new regime in Hindi )

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हर देश का एक कानून होता है और उस कानून के तहत ही सभी कार्यवाही की जाती है। इसी प्रकार प्रत्येक देश में टैक्सेशन को लेकर बहुत से कानून बने हैं। टैक्स बहुत तरह के होते हैं परन्तु हम आज इस लेख में सिर्फ इनकम टैक्स के बारे में ही चर्चा करेंगे।

इनकम टैक्स हर व्यक्ति द्वारा अर्जित की गई आय पर लगने वाला टैक्स होता है। इनकम टैक्स को इस प्रकार से डिज़ाइन किया गया है गरीब व्यक्ति पर टैक्स का बोझ न पड़े, इसके बाद मिडिल क्लास के लिए थोड़ा ज्यादा टैक्स और ज्यादा आय होने पर ज्यादा टैक्स बनता है। इसके लिए एक स्लैब बनाया गया है जिसके माध्यम से टैक्स की गणना की जाती है। कोई भी व्यक्ति चाहे वो नौकरी पेशा हो, सेल्फ एम्प्लॉयड हो या कोई बिज़नेस मैन, सभी के लिए टैक्स का स्लैब एक जैसा ही है सिर्फ अर्जित की जाने वाली आय के अनुसार ही स्लैब कम या ज्यादा होता है। पिछले बहुत सालों से यह स्लैब चलता आ रहा है, जिसमे शुरुआत में कुछ राशि पर कुछ भी टैक्स नहीं लगता और उसके बाद टैक्स प्रतिशत बढ़ता जाता है।

इसमें सरकार धारा 80 सी के अंतर्गत आप कुछ सेविंग करते हैं तो टैक्स में छूट भी मिलती है। 80 सी के जैसे ही कुछ और भी ऐसे अधिनियम हैं जिसमे टैक्स में छूट दी जाती है, अभी हम इसे विस्तार से जानेंगे। यह एक पुराना तरीका है इसी के साथ साथ सरकार टैक्स कैलकुलेशन के लिए एक नई योजना भी लाई है जिसमे टैक्स की गणना अलग तरह से की जाती है। आज हम पुरानी योजना और नई योजना दोनों को विस्तार से जानेंगे।

ओल्ड टैक्स रिजीम बनाम न्यू टैक्स रिजीम ( Income Tax Old Regime vs New tax Regime )

अगर आप कहीं नौकरी कर रहे हैं तो आपकी कंपनी ने आपको अभी तक इन्वेस्टमेंट डेक्लेरेशन का फॉर्म दे दिया होगा जिसमे आपको अपना इनकम टैक्स रिजीम चुनने का विकल्प भी दिया जा रहा है। आपको अभी अपने इंप्लॉयर को ये बताना है कि आप किस टैक्स रिजीम में अपना टैक्स रिटर्न फाइल करेंगे। इस बार के बजट में नए टैक्स रिजीम में काफी बदलाव हुए हैं, जिसके बाद अब 7 लाख या इससे कुछ ऊपर की आय वाले टैक्सपेयर्स नए टैक्स रिजीम को चुनना पसंद कर सकते हैं। ऐसे में आपके लिए भी जरूरी है कि टैक्स फाइलिंग के पहले कुछ बेसिक बातें जान लें।

इस बार न्यू टैक्स रिजीम ही डिफॉल्ट रिजीम है। आईटीआर फाइलिंग पोर्टल पर आपको सबकुछ न्यू टैक्स रिजीम के हिसाब से मिलेगा, अगर आपको ओल्ड टैक्स रिजीम में टैक्स रिटर्न फाइल करना है तो आपको इस बार अपना टैक्स रिजीम खुद से चुनना होगा। इसमें अच्छी बात यह है कि आप अपनी टैक्स रिजीम हर साल बदल सकते हैं, यानी कि इस बार न्यू में भरा, ये पसंद नहीं आया तो अगले साल फिर से ओल्ड में वापस जा सकते है।

सरकार ने बजट 2023 में न्यू टैक्स रिजीम में कई बदलाव किए हैं और इसे बहुत ही आकर्षक बनाया गया है।

न्यू टैक्स रिजीम को साल 2020 में ही लॉन्च किया गया था, लेकिन अब इसे ज्यादा आसान और आकर्षक बनाने के लिए इसमें कई बदलाव किए गए हैं। अब न्यू टैक्स रिजीम ही डिफॉल्ट टैक्स रिजीम है, इसमें 3 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा और 7 लाख तक आय वालों को टैक्स रिबेट मिलेगा, जिसके बाद उनको भी टैक्स नहीं भरना होगा। इसमें टैक्स स्लैब घटा दिए गए हैं।

नए टैक्स रिजीम के अंतर्गत आप धारा 80 सी, 80 डी, होम लोन ब्याज या किसी भी प्रकार की डिडक्शन नहीं ले सकते। इसमें आपकी आय के अनुसार सीधा टैक्स की गणना की जाती है। यदि आप की आय सात लाख तक है तो ओल्ड टैक्स रेजीम बेहतर है। सात लाख से ऊपर आय वाले नई टैक्स रिजीम की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। यदि आप सभी तरह की डिडक्शन लेते हैं तो ओल्ड टैक्स रिजीम में कम टैक्स लगेगा अन्यथा नई टैक्स रिजीम में जाना ज्यादा फायदेमंद है।

नई टैक्स रिजीम में टैक्स स्लैब टेबल

₹1 से ₹3 लाख तक – 0
₹3 लाख से ₹6 लाख = 5%
₹6 लाख से ₹9 लाख = 10%
₹9 लाख से ₹12 लाख = 15%
₹12 लाख से ₹15 लाख= 20%
₹15 लाख से ऊपर = 30%

ओल्ड टैक्स रिजीम ( Old Tax Regime )

बहुत से लोग अभी भी ओल्ड टैक्स रिजीम को चुन रहे हैं ओल्ड टैक्स रिजीम का ऑप्शन अभी भी आपके पास उपलब्ध है, आप अपनी सुविधा अनुसार कोई भी टैक्स रिजीम चुन सकते हो। ओल्ड टैक्स रिजीम में 2.5 लाख तक की आय टैक्स फ्री होगी और 2.5 लाख से 5 लाख तक की आय 5 पर्सेंट टैक्स लगता है, लेकिन इसमें 12,500 रुपये का रिबेट मिलता है. इसमें 5, 20 और 30 पर्सेंट का टैक्स स्लैब है। ओल्ड टैक्स रिजीम को ज्यादातर टैक्सपेयर्स इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि इसमें आपको 80C सहित और कई धाराओं के तहत टैक्स बचाने का मौका मिल जाता है।

ओल्ड टैक्स रिजीम में टैक्स स्लैब टेबल

ओल्ड टैक्स रिजीम (60 साल से कम उम्र के टैक्‍सपेयर्स के लिए)
0 से ₹2.5 लाख = 0
₹2.5 लाख से ₹5 लाख = 5%
₹5 लाख से ₹10 लाख = 20%
₹10 लाख से ऊपर = 30%

कैसे खुद के लिए करें सही चुनाव।

आपको कौन सा टैक्स रिजीम चुनना है या यूँ कहें कि आपको किस रिजीम में कम टैक्स देना पड़ेगा, ये देखने के लिए आप टैक्स कैलकुलेटर की सहायता से कैलकुलेशन कर सकते हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने न्यू टैक्स रिजीम को डिफॉल्ट बनाने के बाद एक नया टैक्स कैलकुलेटर जारी किया था, ताकि टैक्सपेयर्स ये कैलकुलेट कर सकें कि उनकी आय पर किस रिजीम में कितना टैक्स बन रहा है। इस कैलकुलेटर की मदद से आप भी अपने लिए सही निर्णय ले सकते हैं। ये कैलकुलेटर आपको इनकम टैक्स की वेबसाइट पर मिल जाएगा।

निष्कर्ष


आय कर विभाग द्वारा रिटर्न भरने के लिए दोनों विकल्प दिए गए हैं। यह अब आपको तय करना है कि आप किस विकल्प को चुनते हो। सही विकल्प चुनने के लिए पूरी जानकारी होनी चाहिए और इस लेख में हमने दोनों विकल्पों को विस्तार से बताया है ताकि आप सही जानकारी प्राप्त करके सही विकल्प का चुनाव कर सको।

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